भूमण्डलीकरण के दौर में रोजगार के क्षेत्र

 

आदिकाल से ही सभी को रोजी रोटी की चिन्ता सताती आयी है लेकिन आज भूमण्डलीकरण के इस युग में युवाओं को रोजगार की चिंता अधिक सताने लगी है। लेकिन ग्लोबलाइजेशन के दौर में रोजगार की संभावनाएं भी बढी हैं इसके साथ ही प्रतियोगिता भी बढी है। आज व्यापार का युग हैं। इसमें जहा एक तरफ युवाओं के रोजगार की समस्याएं कम होती नजर आ रही है वही दूसरी ओर परिस्थितियां भी जटिल हो रही है।

 

      वर्तमान समय में पहले की भांति अब केवल बी.ए. या एम.ए. लेने से अच्छे भविष्य का निर्माण नही किया सकता। किन्तु इन डिग्रीयों की अहमियत अभी भी कम नही लेकिन किसी भी रोजगार पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने से पूर्व अपनी रूची, योग्यता, आर्थिक स्थिति तथा कोर्स के बारे में पूरी जानकारी भली प्रकार से लें। युवाओं को सही कैरियर का चुनाव करने में सहायता देना अभिभावकों का कर्तव्य है। लेकिन इसमें बच्चों की रूची का भी विशेष ध्यान रखे। उन पर अपनी इच्छाएं न थोंपें। उनका सिंर्फ मार्गदर्शन करे फैसला उन्हे स्वयं लेने दे। तभी जाकर उनमें आत्मविश्वास की लहर जागेगी। युवाओं के लिए किन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर हैं और इस समय किन क्षेत्रों में संभावनायें बनी हुई। इनमें से कुछ का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया जा रहा है:-

 

विदेशी भाषाओं मे रोजगार

 

      वर्षों से बड़ी संख्या में लोग विदेशी भाषाओं को सीखने में रूचि रखते आयें हैं। अब इस रूचि को वे अपना कैरियर बना सकते है। आज बाजार में अनुवादक की बड़ी मांग है। रूसी, जर्मन, फ्रांस और जापान जैसी भाषाओं में कुशलता अर्जित करके आप 1000 रूपये प्रति पृष्ठ प्राप्त कर सकते है। अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि किस प्रकार का कार्य इसके अन्तर्गत होगा। इसमें अनुवाद का कार्य, तकनीकी डाटा राजनीतिक भाषणों व पुस्तकों के अनुवाद से सम्बधिंत कार्य आता है। विदेशी भाषा के प्रमाण पत्र और डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए 12वी परीक्षा उतीर्ण करना अनिवार्य है। इन कोर्स को कई विश्वविद्यालय करवाते है जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय भी शामिल है।

 

कंपनी सचिव के रूप में व्यवसाय

 

      कंपनी सचिव के रूप में रोजगार न केवल प्रतिष्ठित और लाभकारी है बल्कि इसमें कार्य संतुष्टि का स्तर भी अत्यंत ऊॅचा है। इन्स्टिट्यूट आफ कंपनी सेक्रेट्रीज आफ इंडिया भारत में कंपनी सचिवों के व्यवसाय को विकसित और संचालित करता है। प्रशिक्षित कंपनी सचिव के लिए नौकरी और स्वतंत्र रूप से व्यवसायिक प्रैक्टिस दोनों ही क्षेत्रों में व्यापक अवसर उपलब्ध है। सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के विकास के साथ कंपनी सचिव के रूप् में संभावनाएं बढी है। कंपनी सचिव के लिए विदेशों में भी अच्छे अवसर है।

 

इलेक्ट्रौनिक मीडिया में रोजगार

 

      इलेक्ट्रौनिक मीडिया में रोजगार के असीमित और शानदार अवसर उपलब्ध है। प्रसारण हेतु कार्यक्रमों से लेकर एनीमेशन वीडियों गेम डिजाइन करने, डिजिटल और फिल्म संपादन जैसे इलेक्ट्रौनिक मीडिया के अनेक क्षेत्र है जहां आप रोजगार के बड़े चुनौती भरे और रचनात्मक अवसर प्राप्त कर सकते है। आज अनेक विश्वविद्यालय और मीडिया संस्थान, इलेक्ट्रौनिक मीडिया में डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित कर रहे है। इसके अंतर्गत कैमरा संचालन, संपादन, एंकरिंग, निर्माण और डिजाइन में विशेषज्ञता हासिल करने सुविधा उपलब्ध है आप ग्राफिक डिजाइनर बन सकते है और वैब डिजाइनिंग या आन लाइन मार्केटिंग में विशेषज्ञता हासिल कर सकते है।

 

      फिल्म उद्योग में डिजीटल तकनीक और एडिटिंग के लिए अनेक अवसर है। इसी तरह टेलीविजन कार्यक्रम निर्माण के क्षेत्रों में भी संपादन और कार्यक्रम निर्माण आदि के बड़े अवसर है। इधर एफ.एम. रेडियों के आने से रेडियों  रेडियों कार्यक्रम के क्षेत्र में तेजी आई है। ये तो रही इलेक्ट्रौनिक मीडिया के क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति के कुछ व्यवसायों की बात। लेकिन इसके अलावा भी संभावनाओं की कोई कमी नही। पर्दे के पीछे कई ऐसे व्यवसाय हैं जिनमे हाथ आजमाया जा सकता है। इनमें कैमरा संचालन, ध्वनि रिकार्डिंग, पटकथा लेखन, संपादन, निर्माण आदि प्रमुख है। ये व्यवसाय भी उतने लाभप्रद और दिलचस्प है।

 
 
 

एम.सी.ए.

 

मास्टर आॅफ कम्प्यूटर एप्लिकेशन तीन वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम है। जिसमें कम्प्यूटर विज्ञान और अनुप्रयोगों में सैद्धांतिक जानकारी और व्यावहारिक अनुभव के अवसर प्रदान किये जाते है। रोजगार की जो संभावनाएं आज कम्प्यूटर के क्षेत्र में हैं उतनी किसी अन्य क्षेत्र में नही है। मगर प्रत्येक छात्र तथा अभिभावक इसी विषय पर भ्रमित है कि कोर्स में क्या करें। कोई कहता है हार्डवेयर, कोई प्रोग्रामिंग तो कोई मल्टीमीडिया। छात्रों को समझाना आवश्यक है कि ये सभी कोर्स अपनी-अपनी जगह पर अच्छे है। मगर महत्वपूर्ण यह है कि जिस क्षेत्र को चुनें उसमें महारथ अवश्य हासिल करें तभी भविष्य में अच्छे अवसर प्राप्त हो सकतें है। आप अपनी रूची के अनुरूप कोर्स का चयन कर सकते हैं।

 

तकनीकी शिक्षा (आई.टी.आई) का महत्व

 

आज युग वैज्ञानिक युग है जिसमें तकनीकी शिक्षा का विशेष का महत्व है। बिना तकनीकी ज्ञान के किसी राष्ट्र की प्रगति सम्भव नहीं है। कौशलम् बलम् अर्थात् कौशल या तकनीक ही शक्ति है। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिये कोई विद्यार्थी बाहरवीं परीक्षा उतीर्ण करने के उपरांत आई.आई.टी. (इण्डियन इन्स्टीट्यूट आफ टेक्नोलॅजी) एव बी.ई. (बेचलर आफ इंजीनियरिंग) की प्रवेश परीक्षा देकर आई.आई.टी. या बी.ई. का चार वर्षीय कोर्स कर सकता है एवं एक इंजीनियर बन सकता है। इंजीनियरिंग विभिन्न विषयों में की जा सकती है यह - सिविल इंजीनियरिंग, मेकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर साइन्स, इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजी, आर्किटेक्चर इंजीनियरिंग, माइनिंग इंजीनियरिंग आदि।

 

     इंजीनियरिंग की डिग्री के अलावा इंजीनियरिंग में डिप्लोमा (पाॅलिटेक्निक) किया जा सकता है जिनकी अवधि सामान्यतः तीन वर्ष एवं सेडविच कोर्सेज में साढ़े तीन वर्ष होती है। इंजीनियरिंग डिप्लोमा हेतु दसवीं एवं बारहवीं की मैरिट के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया अपनाई जाती है। डिप्लोमा कोर्स सामान्यतः सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, प्रोडक्शन इंजीनियरिंग, रेफ्ररिजरेशन एण्ड एयरकण्डिशनिंग इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर इंजीनियरिंग, आटोमोबाईल इंजीनियरिंग इत्यादि में किया जा सकता है।

 

     इंजिनियरिंग में डिग्री एवं डिप्लोमा के अतिरिक्त तीसरा मुख्य कोर्स आई.टी.आई. का है। आई.टी.आई. अर्थात् इण्डस्ट्रीयल ट्रेनिंग इन्सटीट्यूट का कोर्स मुख्यतः तकनीकी कौशल प्रदान करने का सर्वोत्तम माध्यम है। आई.आई.टी. कोर्स हेतु न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आठवी, दसवीं, एवं बारहवीं, होती है। कोर्स अवधि सामान्यतः 1 वर्ष या दो वर्ष होती है। कौशल या तकनीक प्राप्त करने का मुख्य स्त्रोत आई.आई.टी. उत्तीर्ण करने के पश्चात् व्यक्ति स्वयं का रोजगार प्रारम्भ कर सकता है एंव दूसरे व्यक्तियों को भी रोजगार के अवसर प्रदान करवा सकता है। प्रवेश हेतु जिला स्तर पर बनाई गई मेरिट के आधार पर प्रवेश दिये जाते है। आई.टी.आई. में प्रवेश के लिए आयु 14- 40 वर्ष होती है तथा विभिन्न कोर्सेज में प्रवेश के लिए शैक्षणिक योग्यता एवं कोर्स अवधि अग्रांकित सारणी में दी गई है। आयु सीमा निम्नानुसार है।

 

                           प्रवेश में आयु सीमा

 

1 अम्यर्थी की आयु 1 अगस्त, 2006 को 14 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।

 

2 अनुसूचित जाति / अनुसूचित जन जाति / महिला अभ्यर्थियों के लिए ऊपरी आयु

 

 सीमा में 5 वर्ष की छूट है।

 

3 विकलांग अभ्यर्थियों के लिए ऊपरी आयुसीमा में 10 वर्ष की छूट है।

 

4 भूतपूर्व सैनिकों एवं सैनिक विधवाओं के लिए ऊपरी आयु सीमा 45 वर्ष है।

 

5 सहशिक्षा औ.प्र.संस्थानों में विधवा एवं तलाकशुदा महिला अभ्यर्थियों के लिए ऊपरी आयु             सीमा में 15 वर्ष की छूट है।

 

6 इन अभ्यर्थियों को जिला दण्डनायक/ न्यायलय द्वारा प्रदत्त वांछित प्रमात्र - पत्र करना अनिवार्य है।

 

7 केवल महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने वाली महिलाओं के लिए ऊपरी आयु सीमा में पूर्ण छूट होगी।

 

आशुलिपि सीखिए और रोजगार पाइये

 

आशुलिपि क्या है ?

 

     महाभारत के प्रथम अध्याय (आदि पर्व) के कथा वर्णित है - जब महाभारत के प्रणेता महर्षि वेद व्यास जी ने महाभारत के प्रणयन का विचार किया तो उन्होने ब्रम्हाजी से कहा कि मैने अपने मन में एक ग्रन्थ की रचना कर ली है, किन्तु पृथ्वी पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो किन्तु पृथ्वी पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो मेरे बोलने के साथ-साथ उसे लिपिबद्ध कर सके, ब्रम्हाजी ने कहा - गणेश जी आशुलेखन की कला के ज्ञाता है। अतः आप उनसे ही इस हेतु निवेदन करें। महर्षि व्यास द्वारा गणेश जी ने कहा - यदि मेरी लेखनी क्षण भर के लिए भी न रूके तो मैं आपके ग्रन्थ को लिखने को तैयार हूं। महाभारत ग्रन्थ को महर्षि वेदव्यास जी के बोलने के साथ ही साथ गणेश जी ने लिपिबद्ध किया था।

 

     बोलने के साथ लिखने की लिपि को आशुलिपि कहते है। आशुलिपि एक ऐसी कला है जो अन्य कलाओं की भांति अभ्यास से ही आती है।

 

रोजगार के अवसर

 

बेरोजगारी हमारे देश की एक भयंकर समस्या है। आशुलिपि का ज्ञान शिक्षित बेरोजगारों के लिए समुन्द्री तूफान मे घिरे हुए सुरक्षित टापू के समान है। यह एक ऐसी कला है जिसके ज्ञान के लिए न तो अधिक शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता है न अनुभव की। कोई भी बारहवीं उत्तीर्ण व्यक्ति आसानी से अभ्यास द्वारा एक वर्ष में इसका अच्छा ज्ञान प्राप्त कर सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर सकता है। निजी क्षेत्र में वकीलों के यहां व निजी कंपनियों मंे हिन्दी/अंग्रेजी आशुलिपिकों के यहां व निजी कंपनियों में हिन्दी/अंग्रेजी आशुलिपिकों की काफी आवश्यकता रहती है। सरकार क्षैत्र में समय-समय पर कर्मचारी चयन आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, राजस्थान लोक सेवा आयोग व कई सरकारी संस्थाओं द्वारा अपने स्तर पर भी आशुलिपिकों की भर्ती हेतु परीक्षाएं आयोजित की जाती है। इन परीक्षाओं में सम्मिलित होकर बिना किसी सिफारिश के अच्छी नौकरी हासिल की जा सकती है। यदि उच्चगति का अभ्यास हो तो रिपोर्टिंग व्यवसाय सुलभ हो सकता है। ऐसी स्थिति में असेम्बली रिपोर्टर, कमेटी रिपोर्टर, पार्लियामेंट्री रिपोर्टर ओर जजमेंट रिपोर्टर आदि परीक्षाओं में बैठकर उच्च नोकरी प्राप्त की जा सकती है। ये सभी पद अनुभाग अधिकारी के स्तर से लेकर सहायक सचिव के पद के स्तर के होते है।

 

 आशुलिपि की विभिन्न प्रणालियां

 

     हिन्दी व अंग्रेजी भाषा की आशुलिपि की अनेक प्रणालियां है। हिन्दी भाषा में मुख्यतया, ऋषि, टण्डन व जैन प्रणालिया प्रचलित है। अंग्रेजी भाषा में मुख्यतया पिटमैन व स्लोन डुप्लायन की पद्धतियं प्रचलित है। हिन्दी भाषा में ऋषि प्रणाली के आशुलेखक समस्त भारतवर्ष में सर्वाधिक है तथा भारतीय विधानमडलों एवं संसद में इस प्रणाली के रिपोर्टर सर्वाधिक है। ऋषि प्रणाली से सीखने वालों की गति अन्य प्रणालियों के मुकाबले अधिक होती है तथा इस प्रणाली से एक फायदा यह भी है यदि कोई अंग्रेजी आशुलिपि सीखना चाहे तो पिटमैन या स्लोन डुप्लायन की पुस्तक में दिए हुए केवल शब्द चिन्ह, वाक्यांश, संक्षिप्त तथा विशेष चिन्हों को ही सीखना पड़ेगा और आसानी से अंग्रेजी का भी कुशल आशुलेखक बना जा सकता है। हिन्दी अन्य प्रणालियो मे यह सुविधा नही है।

 

     ऋषि प्रणाली से मात्र देा माह में आशुलिपि सीखी जा सकती है तथा 3 - 4 महीनों में गति अभ्यास करके आसानी से 115 - 120 शब्द प्रति मिनट की गति प्राप्त की जा सकती है। ऋषि प्रणाली से 5 - 6 माह में ही कुशल आशुलेखक बना जा सकता है।

 

आवयक सामान

 

     लिखने के लिए एक बहीनुमा लंबी नोटबुक होनी चाहिए। जिसका कागज न ज्यादा चिकना और न खुरदरा होना चाहिए। लिखने के लिए अच्छी निब वाला फाउन्टेन पेन या अच्छी पैंसिल चाहिए। जो न अधिक कड़ी और न अधिक नरम होनी चाहिए।

 

     कुशल आशुलेखक बनने हेतु अभ्यास का बड़ा महत्व है। अभ्यास जहां तक हो सके एक निश्चित समय पर प्रतिदिन कम से कम दो घंटे अवश्य करना चाहिए। अभ्यास किसी अच्छे प्रशिक्षक से ही नोट किया जाना चाहिए। शुरू से ही संकेत लिपि की रेखाओं का अभ्यास संभाल कर करना चाहिए। आरंभ में बिगड़ी हुई रेखा फिर कभी नहीं सुधरती और गति से लिखते समय बड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।

 

पारिश्रमिक

 

     आशुलिपि में 100 शब्द प्रति मिनिट की गति होने पर निजी क्षेत्र में सामान्तः 4000- 5000 रूपये प्रति माह आसानी से पारिश्रमिक मिल जाता है। सरकारी क्षेत्रमें आशुलिपिक का प्रारंभिक वेतनमान 4000/- (कुल परिलब्धियां अनुमानित रूपये 6800 / - प्र.मा.) व 5000 व 5500 के वेतनमान में भी आशुलिपिक के पद होते है। यदि विद्यार्थी आशुलिपि में 140 से 160 शब्द प्रति मिनिट की गति से लिख लेते है तो वे असेम्बली रिपोर्टर का प्रारंभिक वेतनमान रू. 6500 /- (कुल परिलब्धियां रू. 11000 / - प्र.मा.) पार्लियामेन्ट रूपये 8000 /- (कुल परिलब्धिां रूपये 14000 प्र.मा.) व 10000 का वेतनमान है।

 

 शिक्षणसुविधा

 

     वर्तमान में जयपुर शहर में अनेक निजी प्रशिक्षण संस्थान एवं सरकारी क्षेत्र में आई.टी.आई. व राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा आशुलिपि का प्रशिक्षण दिया जाता है। एवं सर्टीफिकेट व डिप्लोमा प्रदान किये जाते है।

 

    

 
 

 

 

इंटरनेट से पाएं रोजगार

 

     इंटरनेट के द्वारा शिक्षित नवयुवक अपनी योग्यता के अनुसार रोजगार खोज सकते है। वेबसाइट पर अपना आवेदन डालकर रोजगार खोजने की जिम्मेदारी इंटरनेट पर डाल सकते है। यह कार्य घर बैठकर या किसी साइबर कैफे में जाकर किया जा सकता है।

 

     आप अपने शहर से लेकर अमरीका के किसी शहर तक में रोजगार इंटरनेट के माध्यम से प्राप्त कर सकते है। भारत में रोजगार से सम्बन्धित वेबसाइट है।
www.naukri.com

- इस वेबसाइट पर अपना बायो डाटा डालकर रोजगार ढूंढने की जिम्मेदारी इस साइट पर डाल सकते है। इस वेबसाइट पर इंजनियरिंग, कम्प्यूटर, प्रबंध, विज्ञापन, वित्त, विपणन, चिकित्सा आदि से लेकर विभिन्न क्षेत्रों के बारे में रोजगार की कई सूचनाएं उपलब्ध हो सकती है।
www.edgeindia.com

- इस साइट में प्रबंधन, साॅफ्टवेयर, सूचना प्रौद्योगिकी, टेलीकाम, उत्पादन, बिक्री, वित्त, व्यावसायिक, मानव संसाधन आदि से सम्बधित रोजगारों की सूची है।

    

www.careersalah.com  - प्रसिद्ध कैरियर सलाहकार संजय सुमन की कैरियर सलाह से सम्बधित हिन्दी की पहली वेबसाइट है। इसमें आप कैरियर विकल्प, शैक्षणिक संस्थाएं आदि कैरियर से जुड़े प्रश्नों के उत्तर पूछ सकते है।

  www.placementindia.com

- इसमें आप अपना बायोडाटा भेज सकते है तथा रिक्तयों के विषय में जानकरियां हासिल कर सकते है।

    www.indianparttimejobs.com - इस वेबसाइट पर अंशकालिक नौकरी खोज सकते है। यह वेबसाइट भारत के सभी महानगरों तथा बड़े शहरों में स्थानिय रिक्त पदों की श्रेणीवार जानकारी भी उपलब्ध कराती है।
 

www.link-software.com - इस पर आप भारत और अमरीका के प्रौद्योगिकी से संबंधित रोजगार के अवसरों का पता लगा सकते है। कम्प्यूटर के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वालों के लिए यह वेबसाइट उपयोगी है।

    www.webindia.com

- यह साइट रोजगार के इच्छुक व्यक्ति को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय रोजगार दिलाने वाली एजेंसियों से जोड़ती है।

    www.bomputerjobs.com अमरीका में रोजगार पाने के इच्छुक विद्यार्थी इस साइट का फायदा उठा सकते है।

 

 

      
     
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