जीवन परिचय :

(भोजराज पेन्टर)

१.      नाम : भोजराज माली (सोलंकी)।

२.      पिता का नाम : श्री आसूराम जी सोलंकी।

३.      जन्मतिथि : १० अक्टूबर १९३७ आसोज सूदी ६

४.      जन्म स्थान : जेल रोड़, बीकानेर (राजस्थान)

५.      कला शिक्षा : चित्रकला की प्रारम्भिक द्रकॉटेज इण्डस्ट्रीज चोपडा़ कटला, बीकानेर में प्राप्त की।

६.      चित्रकला की तरफ रूझान : बचपन में अपनी स्कूल के एक सहपाठी को चित्र बनाते देखकर।

७.      प्रभावित : सुप्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा तथा मुरगांवकर की कलाकृतियों को देखकर स्वयं ने चित्रकार बनने का संकल्प लिया।

८.      प्रोत्साहन-सानिध्य : अपने नाना स्व. श्री आज्ञारामजी के सानिध्य में रहकर कला के प्रति आस्था को जागृत किया।

९.      कला गुरू : राष्ट्रीय खयाति प्राप्त चित्रकार श्री द्वारकाप्रसाद वर्मा एवं गुलाम फखरूद्‌दीन उस्ता।

१०.  संरक्षण : सुप्रसिद्ध चित्रकार एवं सुनहरी नक्कासी कला के सिद्धहस्त शिल्पी श्री हिसामुद्‌दीन जी उस्ता।

११.  कला की व्यावसायिक शिक्षा : सन्‌ १९४९ से १९५१ तक कला गुरू श्री फखरूद्‌दीन उस्ता से चित्रकला शिक्षा ग्रहण की।

१२.  स्वतंत्र व्यवसाय : सन्‌ १९५१ में द्रभोज हाईक्लास पैन्टिंगश वर्क्स के नाम से मरूनगरी बीकानेर में अपना स्वतंत्र स्टूडियों स्थापित किया जो आज भी अपने मूल स्वरूप के साथ-साथ आधुनिकता के लिए कार्यरत।

१३.  चित्रकारी : ऊंट की खाल पर स्वर्णयुक्त मीनाकारी कर असंखय कृतियों का तथा अब तक सैकड़ों धार्मिक कला-कृतियों का सृजन किया।

१४.  कला प्रशिक्षण : अपने स्टूडियों में अब तक सैंकडो़ नवोदित चित्रकारों को चित्रकला का प्रशिक्षण दिया है। जो आज भी उच्च श्रेणी के व्यवसायी चित्रकारी के रूप में बीकानेर, जयपुर व श्रीगंगानगर आदि जिलों में कार्यरत है।

१५.  कला जगत में : (१) रंगकर्म, संगीत, साहित्य, रामलीलाओं तथा नाटकों के लिए कई जीवंत पर्दे व पोर्टेट और डिजाइन आदि रचनात्मक सेवाएं देते है।

(२) आकाशवाणी, बीकानेर से दिनांक ३०.०४.१९९८ को पैन्टिंग विषय पर भेटवार्ता, ३१.१०.२००२ को चित्रकला पर प्रसारण तथा भारत प्रसिद्ध पत्र दैनिक लोकमत में साईन बोर्ड पर नियमित प्रस्तुति दिनांक १५.०६.१९९८ से २५.०६.१९९८ तक लगातार।

(३) चित्रकला की पोस्टर, पैन्टिंग, पोस्टकार्ड पर चित्रकला प्रदर्शनियों में निर्णायक का काम करके बाल व युवा कलाकारों का उत्साह बढाया। कला गोष्टियो में मुख्य आतिथ्य तथा अध्यक्षता की।

(४) ग्रामीण जगत की कला के गहन अध्ययन हेतु गांवों-गांवों के भ्रमण के अन्तर्गत उतरप्रदेश के पहाडी़ इलाकों एलोरा अजन्ता व एलीफेन्टा जैसे कई दर्शनार्थ व कलात्मक स्थलों की यात्रा। बंगलौर, दिल्ली, मुम्बई आदि के प्रसिद्ध म्यूजियमों का अवलोकन कर भारतीय कला का गहन अध्ययन।

१६.   संघ प्रवेश : १९४७ में विभाजन के समय में भारतीयों पर हुए बर्बरता पूर्ण अत्याचार तथा लाशों से भरी रेल आदि को सुनकर १० वर्षो की अवस्था में जाना प्रारम्भ किया।

१७.  राजनीतिक क्षेत्र : भारत में हुए गौ-हत्या विरोधी आन्दोलन में दिल्ली में इन्दिरा सरकार द्वारा गौ-भक्तों पर गोलियां व लाठियों से बर्बरतापूर्वक हत्याओं को देखकर जनसंघ व बाद में भाजपा जोईन की। १८ फरवरी को दिल्ली गये और पुलिस के डण्डे खाते हुए भी चेतना रैली में भाग लिया।

(१) १९७६ में इमरजेन्सी में बीकानेर पुलिस सिटी कोतवाली में थोनदार ने यातनाए दी। थाने से भागकर गायब हुआ। ४ फरवरी १९७७ को वापिस बीकानेर आया तभी से तत्कालीन जनता पार्टी प्रचार में जुट गई।
(२) पूर्व में भाजपा बीकानेर में जिला उपाध्यक्ष, श्रीकोलायत तहसील में भाजपा अध्यक्ष तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के द्राहर व देहात जिला अध्यक्ष रहते हुए २४ अक्टूबर  १९९४ को जयपुर में अयोजित ओ.बी.सी. रैली में स्थानीय कार्यकर्ताओं को ११ वाहनों मं भरकर ले गया।

(३) २९ नवम्बर १९९२ में अयोध्या कार सेवा में अस्वस्थता के कारण पुत्र जितेन्द्र (पार्षद भाजपा) को भेजा, माछरा जेल में यातनाएं सही ०६.१२.१९९२ में भी मेरी अस्वस्थता के चलते सुपुत्र जितेन्द्र को भेजा, ढांचा गिराने में सहभागिता निभाई।

(४) वर्तमान में बीकानेर जिलें के  भाजपा के विशेष आमन्त्रित सदस्य के रूप मे  सक्रिय है
 
१८.  राष्ट्रहित में सेवाएं : उतरी पश्चिमी राजस्थान के अकाल की चपेट में आने पर जन सहयोग से बीकानेर की श्रीकोलायत तहसील के गांवों में जाकर अनाज और कपडो का वितरण।

१९.  सामाजिक क्षेत्र में सेवाएं : (१) समाज में व्याप्त कुप्रथाओं महिला, अच्चिक्षा, बाल-विवाह  दहेज प्रथा, विधवा विवाह सहित कई कुप्रथाओं को समाज से दूर करने के लिए उल्लेखनीय कार्य किया तथा सामाजिक कार्यों में अग्रसर रहते हुए श्रीकोलायत मंदिर के ऐतिहासिक कपिल सरोवर के जीर्णोद्वार में सहयोग दिया तथा घाट के समीप बैठने कि लिए कुर्सियों, जूताघर, पार्क में ट्‌यूबवेल और मन्दिर में पानी की टंकी के कार्य को पूरा करने के लिए एक समिति का गठन कर इस दिच्चा में एक महत्वपूर्ण सफलता अर्जित की।

(२) बीकानेर में अकाल सहायतार्थ गायों और हिरणों के लिए घास व पानी की कुण्डियों की व्यवस्थार्थ ५०००/- रूपये के जन सहयोग से दिये।

२०.  कला निर्देशन : सन्‌ १९९१ में गुलाबी नगरी जयपुर में संस्कार भारती द्वारा आयोजित

वृहद कला प्रदर्च्चनी में प्रसिद्ध चित्रकारों सत्यनाराण मौर्य, सत्यनारायण भारद्वाज, आलोक कार्टूनिष्ट के साथ चित्रांकन कार्य किया प्रदर्शनी के समापन पर राजमाता विजयराजे सिंन्धिया द्वारा पुरस्कृत तथा भाजपा अध्यक्ष रामदास अग्रवाल द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान हुआ। संस्कार भारती के माध्यम से भारत के बड़े-बडे शहरो में प्रदर्शनी व प्रत्यक्ष चित्रण  किये।

२१.  संस्थापक सदस्य : अनुराग कला केन्द्र, बीकानेर महात्मा ज्योतिबा फूले संस्थान, बीकानेर।
 
२२.  संस्थाओं से जुडाव : संस्कार भारती (संभागीय उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष), पश्चिमी राजस्थान विकास परिद्गाद (प्रदेच्च महामंत्री), कपिल धाम विकास समिति (तहसील अध्यक्ष), श्री दीनदयाल उपाध्याय स्मृति संस्थान (संगठन प्रदेश मंत्री) आदि।

२३.  अकादमी सदस्य : १५ दिसम्बर १९९४ में राज्य सरकार द्वारा राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर में दो वर्षो के लिए सदस्य मनोनित उपरान्त प्रदर्शनी व वित विभाग प्रभारी।

२४.  संग्रहण : गौ सेवा संघ, राधा मन्दिर, बीकानेर, शिवमन्दिर (नोखा), तुलसी कुटीर बीकानेर, कलकता, बम्बई, जयपुर, दिल्ली सहित कई शहरो में कला प्रेमियों के निजी संग्रहालय में कलाकृतियां संग्रहित।

२५.  प्रतिभाओं को प्रोत्साहन :संस्कार भारती के बैनर तले पिछले कई वर्षो से निरन्तर बाल कलाकारों को प्रोत्साहित किया, युवाओं का उत्साह बढाया तथा वयोवृद्ध कलाकारों का सम्मान किया। १०८ बाल-कलाकारों, ७२ युवा कलाकारों तथा ३२ वरिष्ठ गुरूजन कलासाधकों (साहित्य, संगीत, चित्रकला एवं अभिनय के क्षेत्र में) को सम्मानित किया है। भारत के विशिष्ट व्यक्तित्व के कर कमलों द्वारा कलाकारों को सम्मानित करने का कार्यक्रम प्रसारित किया गया है व आगे भी किया जाता रहेगा।

२६.  कलाकारों में चेतना जाग्रति : पाश्चात्य सभ्यता से आई कला-विकृतियों को मिटाने तथा भारतीय कला में जन चेतना जगाने का महत्वपूर्ण प्रयास। अपने अथक प्रयासों से राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर के सहयोग से सन्‌ १९९५ में श्री गंगानगर व बीकानेर में कला चेतना एवं कला प्रदर्शनी आयोजन।

२७.  सम्मानित : जिला प्रशासन, बीकानेर द्वारा गणतंत्र दिवस १९९७ व २००५ पर सम्मानित।

२८.  भेंट किये गये कलात्मक चित्रों से प्रभावित : बीकानेर के पूर्व महाराजा स्व. श्री करणीसिंहजी, श्री अटल बिहारी वाजपेयी, श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्रीमती सुषमा स्वराज, स्वामी श्री सोमेश्वरानन्द (पंचमन्दिर बीकानेर), स्वामी रघुवरदयालजी (ऋषिकेश), श्री ललित किशोर चतुर्वेदी (पूर्व मंत्री, राज. सरकार), श्री हरिशंकरजी भाभड़ा (पूर्व उपमुखयमंत्री) श्री देवीसिंह भाटी (पुर्व मंत्री, राज. सरकार), श्री हर्षवर्धन (पूर्व मंत्री, दिल्ली सरकार), श्री महेन्द्र सिंह भाटी (पूर्व सांसद, बीकानेर), श्री महेश शर्मा (सांसद व वरिद्गठ लेखक),  श्री किशन भैया (भारती भवन, जयपुर), श्री प्रकाश चन्द्र (प्रदेश महामंत्री, भाजपा)

२९.  आर्थिक क्षेत्र में सहयोग : (१) १४ जनवरी १९८९ आडवाणीजी के बीकानेर आगमन पर श्रीकोलायत से ७०५१/- की राशि भेंट स्वरूप दी।

(२) १७ मई १९९१ बीकानेर से संग्रहित राशि ३१०००/- रूपये श्री मदनजी  सैनी के चुनाव में माननीय श्री मुरलीमनोहरजी जोशी को झुंझुनूं की आम सभा में भेट।

(३) १५ नवम्बर १९९३ स्वजाति बन्धुओं से रामकिशोर सैनी के चुनाव हेतु ११०००/- रूपये भेंट स्वरूप भेजे।

(४) २६ जनवरी २००१ में गुजरात में हुए भुकम्प व उडीसा में आए तुफान से पीडित जनता तक सीमा जन समिति (जोधपुर प्रान्त) को बीकानेर से एकत्रित कुल राशि  १००००/- रूपये आरएसएस के मार्फत भेजी।

३०.  आगामी कार्ययोजना : हिन्दू दर्च्चन चित्र प्रदर्च्चनी हेतु गत ३ वर्षो से चित्रों पर अध्ययन तथा अब प्रदर्शनी हेतु ५० विषयो पर चित्रांकन प्रारम्भ, जिन्हे भारत के विभिन्न नगरों में हिन्दुत्व के प्रति चेतना जागृत की आगामी योजना में कार्यरत।

 

२००३ के बाद

१. दिनांक १८ मई २००४ को प्रेरणा प्रतिष्ठान बीकानेर द्वारा प्रतिभा सम्मान समारोह कार्यक्रम में तिलक मार्ल्यापण, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह व शोल ओढाकर अजन्ता कलामणी से सम्मानित किया तथा समाज रत्न से अंलकृत किया गया।

२. दिनांक ०६.०६.२००४ को आकाशवाणी बीकानेर के विशेष कार्यक्रम  में भेटवार्ता प्रसारित हुई विषय चित्रकला

३. दिनांक २३.०८.२००४ मोना आर्ट गेलेरी में युवा चित्रकारों की प्रदर्शनी के उद्‌घाटन के अवसर पर अध्यक्षता की।

४. दिनांक ०७.०९.२००४ श्री कृष्ण जन्माष्ठमी के पावन पर्व पर विश्व हिन्दु परिषद द्वारा प्रतिद्गिठत व्यक्तित्व के नाते सम्मानित।

५. दिनांक ०६.०९.२००४ को ही च्चिवच्चक्ति युवा मण्डल द्वारा जन्माष्ठमी जीवित रूप सज्जा के बाल कलाकारों को पुरूस्कार दिये।

६. दिनांक २४.०९.२००४ को बीकानेर श्निश्चर जी बड़ा मन्दिर के पं. गोरीशंकर भार्गव द्वार नवग्रह उत्पति महिमा सार ज्ञान गंगा का दीप प्रज्वलन कर शुभारम्भ किया।

७. दिनांक २०.११.२००४ को सतप्रेरणा परिषद द्वारा राजगुरू महामंडलेश्वर स्वामी श्री विशोकानन्दजी भारती के कर कमलों से माल्यार्पण प्रतीक चिन्ह व शॅाल ओढाकर सम्मानित किया गया।

८. दिनांक मई २००७ राजस्थान सरकार ने राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रौन्नति प्राधिकरण  ए श्रेणी का चित्रकार 

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